सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर सनातन का जयघोष
सनातन संस्कृति का जयघोष करती अरब सागर की लहरें, हवा में 'हर-हर महादेव' के जयकारों के बीच आस्था का सैलाब लेकर आराधना में जुटे हजारों श्रद्धालु, डमरूओं की मधुर ध्वनि के साथ 'ओम नमः शिवाय' के जाप से सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर पूरा परिसर, महादेव के स्वर्ण कलश की आभा को सौ गुना बढ़ाती दिलकश साज सज्जा एवं इन सभी के बीच खड़ा एक ऐसा अनूठा, दिव्य,भव्य और प्रतिष्ठित मंदिर… जो समय की हर चुनौती को गरिमा के साथ पार करता आ रहा है। हम बात कर रहे हैं देवों के देव महादेव के सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की और यहां आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर न सिर्फ भारतीय सांस्कृतिक विरासत में अहम धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति की अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है। यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि विनाश और पुनर्निर्माण की, आस्था और संघर्ष की एक जीवंत कहानी है । सोमनाथ मंदिर की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे सीधे पौराणिक काल से जुड़ी हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक चंद्रमा ने खुद इस मंदिर की स्थापना की थी, ताकि शिव की कृपा पाकर श्राप...